काव्य श्रृंखला – 67


अजी सुनते हो

हैलो जी, हैलो जी; मेरी भी सुनो जी 📢
पते की कहूं बात सुनकर गुनो जी 🎷

मिले थे हरिश्चंद्र, मदिरा के मद में 🥂
मगर पत्नी को व्यस्तता हैं गिनाए 👩‍💻

रजाई में दुबकी सजनिया पति को 🛌
उदर क्षेत्रवृद्धि पर ताने सुनाए 🤷

उधारी चुकाने को बोले महाजन 🕵️
रहे घर में बेशक, पर लंदन बताए 🚀

अजी देखकर नोटिफिकेशन में संदेश 🥳
“बहुत हूं बिजी” कहकर ब्लू टिक हटाए 😓

दिखे ऑनलाइन अगर सजना सजनी 👥
बने “व्योम बख्शी” मगर खुद छ्पिाए 👮

सभी कांडों में है मेरी राजदारी 🤫
कहो तो सभी गुप्त फोल्डर दिखाएं 🗂️

सजाता हूं गूगल के सर्वर पर फाइल 🧾
अजी सुनते हो, मैं हूं प्यारा मोबाइल 📱

© Arun अर्पण

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