औरत


सबके अपने अपने नजरिए है
सबकी अपनी अपनी सोच है
देखें तो औरत एक मां है
न देखे तो वो एक बांझ है

मर्दों ने खिलौना समझा है उसको
कितना मूर्ख इंसान है ?
औरत का अपना अस्तित्व है
अपनी एक पहचान है

जिसने जीवन दिया है
उसे,पैर की जूती समझ लिया है
कितने तुच्छ हैवान है ??
औरत एक जननी , बहन और बेटी है
उसकी अपनी एक शान है

कभी दहेज तो कभी बलात्कार
का शिकार बनाया है
उस देवी को चरित्र हीन बताया है
कितने बेरहम,बेशर्म इंसान है ??
औरत अभिलाषा ,अभिमान है
उसका अपना ही एक सम्मान है

सबके अपने अपने नजरिए है
सबकी अपनी अपनी सोच है
देखें तो औरत एक मां है
न देखे तो वो एक बांझ है

रचना : अल्हड़ सी लड़की

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