मां




मेरे हौसलों की उड़ान है मेरी माँ ,
मेरे ऊंचाईयों की पहचान है मेरी माँ ,
मेरे ख्वाहिशों का आसमान है मेरी माँ ,
मेरे बागीचे की बागवान है मेरी माँ ।

गर भगवान ये धरती बनाए न होते ,
सृष्टि में माँ का स्वरूप लाए न होते ,
विश्व कितना विरान सा होता ,
बिन धरती अंबर भी अनजान सा होता।

मेरे होंठो की मुस्कान है मेरी माँ ,
मेरे खुशियो की सौगात है मेरी माँ ,
इस काया की वरदान है मेरी माँ ,
मेरे धड़कन की हर सांस है मेरी माँ ।

हर घर मे रोनक छाती है ,
जब माँए लोरी गाती है ।
जिस भोजन को छू दे माँ ,
प्रसाद वही बन जाती है ।

दुख होने पर भी आँखो से ,
जो अश्क नही बहाती है ,
टूटी हो कितनी भी लेकिन-
वो दर्द नही दिखती है ।

माँ मुस्का दे तो ,घर का –
कोना कोना मुस्काता है ,
जिस घर मे माँ की सुरत है ,
उस घर मे रौनक आता है ।

बिमारी मे भी बच्चे को ,
गोदी मे उठाए रखती है ।
छोड़ जाते है सब लेकिन ,
माँ सिने से सटाए रखती है ।

रातों रात वो जाग कर ,
हमको लोरी वो गाती है ।
खूद भूखी ही रह जाती है  ,
बच्चों का भूख मिटाती है ।

माँ तो माँ होती है ,
जीवन का आधार होती है ,
फूलों सा संसार होती है ,
हर बला से लड़ने को ,
हमेशा ही तैयार होती है ।

जितना सोचू उतना समझू ,
जितना समझू उतना डूबू ,
अल्फाज़ कम पड़ जाते है ,
जो माँ पर लिखने आते है ,
क्या लिखू मै माँ के ऊपर ,
मै उसकी ही लेखनी हूँ ।

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