इश्क ❤️



सब कुछ लिख के भी मन कहे कि अभी सब अधूरा है
वो एक अल्फ़ाज़ ही तो ❤️’इश्क़’❤️ है
💕😘💕😘💕😘💕😘💕😘💕😘💕😘
भीड़ में रखे जो खुद में तन्हा सन्नाटों में आवाजें हो
खामोशी से भरे कमरें में किस्सा ही तो ❤️’इश्क़’❤️ है
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कितना कुछ है कहने को कितना बाकी है अभी सजने को
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बिना शब्दों के फीका हो जाना
उस दीदार पे अज़ब हाल हो जाना ऐसा ❤️’इश्क़’❤️है
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किताबों की तालिमो से ज़्यादा, समाज की रश्मों से आगे
अनदिखे धागों से उलझा ये तेरा- मेरा ❤️’इश्क़’❤️ है

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