गजल



इश्क़ है, या है ख़ालिस अदाकारियाँ ?
सब समझती है जी,आज की लड़कियाँ !!

गुफ्तगू कीजिए , या ज़ुबाँ रखिए बंद
बोलते पर रहिए, आँखों की बोलियाँ !!

क्या ज़रूरत मुझे गुल और गुलाबों की
फूल खुशबू, तुम्हीं मेरी फुल-वारियाँ !!

दौर क़ासिद क़लम का मुकम्मल हुआ
ये जगह अब ले ली हाथों की उँगलियाँ !!

बागबाँ मेरे दिल का जुदा जब हुआ ?
साथ अपने ले गया मेरी किलकारियाँ !!

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