महादेव

हमारे आराध्य कैलाश पर्वत पर बैठे वो "धुरजटी"....तुमसे उन्मोचना का परिणाम आधी रातों की सुगबुगाहट हैजैसे कोई अलक्षित यात्री में तड़पन होती है.....धूप में तरुवर के वटवृक्ष की...मुझे भी मदनमहीने…

श्रृंगार रस

विकट कालिमा घनघोर रात्रि की निहित है उसके केशो में,वक्र भृकुटी उसकी भुजा सी अद्वितीय है कोटिं विशेषों में।ललाट है सूर्य सा तेजमयी पलकें अमूल्य आभूषण हैं,खंजन नयनों की मदिरा…

प्रेयसी ये चंचल नयन तुम्हारे…..

प्रेयसी ये चंचल नयन तुम्हारे मुझसे कितना बतियाते है कुण्दित केश तुम्हारे काले नित प्रेम सुधा बरसाते हैं कानों में बाली के झूमर मानो ये मुझे बुलाते है श्रृंगार तुम्हारा…

आइए महसूस करिए बेटियों के दर्द को….

आइए महसूस करिए बेटियों के दर्द को,देखिए मतलब की गंगा में नहाते हुए मर्द को।वो औरत जिसने जन्म देकर है तुम्हे पाला यहां,जिसके दूध से जली जीवन की ज्वाला यहां।बहन…

रात के आंचल में दिन के कई अफसाने लिखती हूं

रात के आँचल में दिन के कई अफसाने लिखती अपनी खामोशी के लफ्ज़ों में ही पूरी बातें रखती हूँ!तसव्वुर क्या सजाऊँ मै नींदों को आखों मे भरकर, अपने ख्वाब-ओ-ख्याल टूटने…