काव्य श्रृंखला – 61

प्रकृति का उपहार कोयलों की कूक कहीं पपीहों का गान सुनोप्यारी ये प्रकृति मधुर संगीत सुनाती हैहरे भरे कोपलों से मन को प्रफुल्ल करोकोमल मुलायम पत्ती अधर भी खिलाती हैलाल…

श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं

योगीराज कृष्ण - मिथक बनाम तर्क उपहास तेरे रास का संसार ने खुलकर कियापर प्रेम की पराकाष्ठा पर ध्यान ना दिया।तुमने बचाई लाज एक नारी की दुष्टों सेफिर भी तुझे…