विचलित मन की मनोदशा

मानस मन ये,हर पल चलता,मृगतृष्णा सा, दर दर फिरता..भोर भयै मन,सपने बुनते,घर से अपने,पग पग चलता,,आगे बढ़ता,राह पे चलता,आधा रास्ता,हारकर के गिरता,,फिर वो संभलता,फिर वो चलता,फिर से गिरता,फिर से उठता,,जब…