काव्य श्रृंखला – 71

ग्रामीण शिक्षा की बदहाल स्थिति ड्रेस, बूट, कॉपी, बुक, टीचर भी मुफ्त मगरसरकारी स्कूलों से क्यों जनता बिदकाय रहीभरे हैं महीने भर की कमाई फीस में परकॉन्वेंट नाम पर क्यों…

काव्य श्रृंखला – 66

बर्बाद गुलशन मर चुकी मानवता में क्यों जान देखते हो तुमझूठ और फरेबों में क्यों ईमान देखते हो तुममतलबी यारानों में क्यों यार देखते हो तुमटूटते घरानों में क्यों प्यार…